नई दिल्ली: सरकारी बैंकों में विल्फुल डिफॉल्ट की रकम बीते वित्त वर्ष (2018-19) में 1.50 लाख करोड़ रुपए पहुंच गई। इसमें एक तिहाई हिस्सा एसबीआई का है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को संसद में सवालों के जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकारी बैंकों ने पिछले 3 वित्त वर्षों में विल्फुल डिफॉल्टर्स के खिलाफ पुलिस में 1,475 शिकायतें दर्ज करवाईं।

विल्फुल डिफॉल्टर्स पर एसबीआई के 46158 करोड़ रुपए बकाया
ऐसी कंपनियां या व्यक्ति जिनका बड़ा कारोबार हो और जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाते उन्हें विल्फुल डिफॉल्टर घोषित किया जाता है। एसबीआई में के विल्फुल डिफॉल्टर्स पर सबसे ज्यादा 46,158 करोड़ रुपए बकाया हैं। पीएनबी से कर्ज लेने वाले विल्फुल डिफॉल्टर्स पर 25,090 करोड़ रुपए बकाया हैं। बैंक ऑफ इंडिया के विल्फुल डिफॉल्ट की रकम 9,890 करोड़ रुपए है।

विजय माल्या के डिफॉल्ट और नीरव मोदी के घोटाले के बाद सरकार ने विल्फुल डिफॉल्टर्स के खिलाफ नियम सख्त कर दिए हैं। विल्फुल डिफॉल्टर घोषित कंपनियों और व्यक्तियों को बैंकों और वित्तीय संस्थानों की ओर से कोई और सुविधा नहीं दी जाती। उनके 5 साल तक नए उद्यम लाने पर भी रोक लग जाती है।

विल्फुल डिफॉल्टर शेयर बाजार से पूंजी नहीं जुटा सकते और दिवालिया प्रक्रिया में भी नहीं जा सकते। उनके खिलाफ बैंकों के प्रमुख लुकआउट नोटिस भी जारी कर सकते हैं।