मुंबई/बेंगलुरु: कर्नाटक में जारी राजनीतिक संकट के बीच मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने शुक्रवार को स्पीकर से बहुमत साबित करने के लिए वक्त मांगा है। उन्होंने विधानसभा में कहा कि राज्य में जैसी स्थिति है, उसे देखते हुए उन्हें बहुमत साबित करने के लिए समय दिया जाए। कर्नाटक में कांग्रेस के 13 और जेडीएस के 3 विधायक अब तक इस्तीफा दे चुके हैं। हालांकि, स्पीकर ने इन्हें स्वीकार नहीं किया।

इस्तीफा स्वीकार ना होने पर बागी विधायक सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तब तक स्थिति ऐसे ही बनी रहेगी। बागी विधायकों का पक्ष रखते हुए वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि विधानसभा स्पीकर रमेश कुमार कुछ परिस्थितियों को छोड़कर अदालत के प्रति जवाबदेह हैं। स्पीकर इस्तीफे पर फैसला लेने की बजाए प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं। इस याचिका पर अगली सुनवाई मंगलवार को होगी।

स्पीकर और कांग्रेस का पक्ष रख रहे वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि इस्तीफा देने वाले विधायकों का इरादा कुछ अलग है। अयोग्यता से बचने के लिए उन्होंने ऐसा किया है। विधायकों की अयोग्यता पर निर्णय लेने के लिए स्पीकर भी संवैधानिक रूप से बाध्य हैं। स्पीकर की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। वे इस्तीफों की जांच के बाद ही इस पर कोई फैसला लेंगे।

सुनवाई के दौरान वकील राजीव धवन ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री का पक्ष रखा। उन्होंने बागी विधायकों द्वारा स्पीकर पर लगाए आरोपों पर सवाल उठाया। बागी विधायकों ने कहा था कि स्पीकर दुर्भावपूर्ण तरीके से काम कर रहे हैं।

बागी विधायक मुंबई लौटे

विधानसभा स्पीकर केआर रमेश कुमार से गुरुवार शाम 6 बजे मिलने के बाद मुंबई लौट गए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सभी जेडीएस और कांग्रेस के बागी विधायक विधानसभा अध्यक्ष रमेश कुमार से मिलने पहुंचे थे। बागी विधायकों ने बुधवार को रमेश कुमार पर आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उन्होंने कहा था कि विधानसभा स्पीकर जानबूझकर इस्तीफा स्वीकार नहीं कर रहे और इसमें देरी कर रहे हैं।

इससे पहले याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने रमेश कुमार को विधायकों के इस्तीफे पर जल्द फैसला लेकर शुक्रवार तक कोर्ट को बताने के लिए कहा था। इसके बाद विधानसभा स्पीकर ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने मुझे फैसला लेने को कहा है। मैंने हर चीज की वीडियोग्राफी की है। ये सभी चीजें कोर्ट को भेजूंगा। उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा बोला जा रहा है कि मैंने प्रक्रिया में देरी की, यह गलत है। राज्यपाल ने मुझे 6 जुलाई को जानकारी दी और मैं तब तक दफ्तर में था। इसके पहले किसी विधायक ने मुझे यह नहीं बताया था कि वे मिलने आ रहा हैं।’’ स्पीकर ने गुरुवार को कहा कि विधायकों के इस्तीफे प्रामाणिक हैं या नहीं यह जांचने में मुझे रातभर का वक्त लगेगा।