धर्म डेस्क: ज्योतिष में कुल नौ ग्रह बताए गए हैं। इन नौ ग्रहों में चंद्र सबसे तेज गति से चलने वाला ग्रह है। ये ग्रह हर ढाई दिन में राशि बदलता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार चंद्र हमारे मन का कारक है। सबसे सुंदर और चमकीला ग्रह है। जानिए चंद्र से जुड़ी कुछ खास मान्यताएं…

चंद्र ग्रह की उत्पत्ति के संबंध में कई कथाएं बताई गई हैं। एक कथा के अनुसार जब ब्रह्माजी सृष्टि की रचना कर रहे थे तब उन्होंने अपने मानस पुत्र ऋषि अत्रि को उत्पन्न किया। ऋषि अत्रि का विवाह कर्दम मुनि की कन्या अनसूया से हुआ था। अत्रि और अनसूया के तीन पुत्र थे। दुर्वासा ऋषि, भगवान दत्तात्रेय और सोम यानी चंद्र।

चंद्रदेव का विवाह दक्ष प्रजापति की 27 कन्याओं से हुआ था। इन कन्याओं के नाम पर ही 27 नक्षत्र बताए गए हैं। चंद्र जब इन 27 नक्षत्रों का चक्कर लगा लेता है, तब एक मास पूरा होता है।

एक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के समय जब विष निकला तो उसे शिवजी ने अपने कंठ में ग्रहण किया। विष की जलन को शांत करने के लिए शिवजी ने चंद्र को अपने मस्तक पर धारण किया।

चंद्रमा हमेशा घटता-बढ़ता रहता है। इस संबंध में भगवान श्रीगणेश से जुड़ी एक कथा प्रचलित है। कथा के अनुसार एक बार गणेशजी कुबेर देव के यहां से भोजन करके लौट रह थे। तभी चंद्रदेव गणेशजी के विचित्र स्वरूप को देखकर हंसने लगे। जब गणेशजी को चंद्र के हंसने की आवाज आई तो उन्होंने क्रोधित होते हुए और चंद्र को शाप दिया कि अब से कोई भी चंद्र की सुंदरता को देख नहीं सकेगा। ये सुनते ही चंद्र को अपनी भूल का अहसास हो गया और वह भगवान से क्षमा याचना करने लगा। गणेशजी का क्रोध शांत हुआ तो उन्होंने कहा कि मेरा शाप प्रभावहीन नहीं हो सकता है, लेकिन अब माह में सिर्फ एक दिन तुम्हें कोई देख नहीं सकेगा और एक दिन सभी लोग तुम्हें संपूर्ण कलाओं के साथ देख सकेंगे। तुम अब घटते-बढ़ते रहोगे। तभी से चंद्र अमावस्या दिखाई नहीं देता और पूर्णिमा पर पूरी कलाओं के साथ उदय होता है।

विज्ञान के अनुसार चंद्र पृथ्वी का उपग्रह है। चंद्र पर जब सूर्य की रोशनी पड़ती है, तब ये चमकता हुआ दिखाई देता है। पृथ्वी और चंद्र के बीच की दूरी 384,403 किलोमीटर है। जिस तरह पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमते हुए सूर्य का चक्कर लगाती है, ठीक उसी तरह चंद्र भी अपने अक्ष पर घूमते हुए पृथ्वी का चक्कर लगाता है। चंद्र पर भी गुरुत्वाकर्षण है। यह पृथ्वी की परिक्रमा 27.3 दिन में पूरी करता है।

ज्योतिष में चंद्र को कर्क राशि का स्वामी माना गया है। ये ग्रह माता का कारक है और हमारे मन को नियंत्रित करता है। चंद्र को युवा, सुंदर, गौर वर्ण वाला बताया गया है। चंद्र के हाथों में एक मुगदर और एक कमल रहता है। चंद्र के लिए ऊँ सों सोमाय नम: मंत्र का जाप करना चाहिए।