नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता को लखनऊ के अस्पताल से दिल्ली लाने का फैसला टाल दिया है। सुनवाई के दौरान शुक्रवार को सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि पीड़िता के परिजन चाहते हैं कि जब तक उनकी बेटी और वकील की हालत ठीक नहीं हो जाती है, उन्हें लखनऊ के किंग जॉर्ज अस्पताल (केजीएमयू) से शिफ्ट न किया जाए। इसके अलावा शीर्ष अदालत ने पीड़िता के चाचा को रायबरेली जेल से तिहाड़ जेल शिफ्ट करने का आदेश दिया है।

उधर, पीड़‍िता के साथ दुर्घटना मामले में शुक्रवार को ट्रक ड्राइवर और क्लीनर को सीबीआई कोर्ट में पेश किया जाएगा। सीबीआई ड्राइवर आशीष पाल और क्लीनर मोहन श्रीवास को रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीआरपीएफ ने पीड़िता के परिवार और वकीलों को सुरक्षा कवर दे दिया है। सीबीआई ने मामले की जांच कर रहे पुलिसवालों को लखनऊ बुलाया है। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को 7 दिन के अंदर हादसे की जांच पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

शुक्रवार को सीआरपीएफ उन्नाव स्थित पीड़िता के गांव पहुंच गई। परिजन के अलावा पीड़िता के चाचा के मुकदमे की पैरवी कर रहे वकील को भी सीआरपीएफ सुरक्षा दी है। उनकी सुरक्षा में 4 जवान तैनात किए गए हैं। इससे पहले प्रदेश सरकार ने देर रात पीड़िता के परिजन को 25 लाख रुपए की मदद का चेक सौंपा।

पांचवें दिन भी पीड़िता की हालत में सुधार नहीं

रविवार (28 जुलाई) को रायबरेली जाते वक्त सड़क हादसे का शिकार हुई पीड़िता की हालत नाजुक है। वह लखनऊ के केजीएमयू में वेंटिलेटर पर है। पांचवें दिन भी उसकी हालत में सुधार नहीं है। हादसे में पीड़िता की मौसी और चाची की मौत हो गई थी। चाची, दुष्कर्म मामले में सीबीआई की गवाह भी थीं। इस मामले में मंगलवार को सीबीआई ने पीड़िता के चाचा की तहरीर पर विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उसके भाई समेत 10 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था।

पीड़िता की चिट्‌ठी पर सुप्रीम कोर्ट में हुई थी सुनवाई

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव की दुष्कर्म पीड़िता की 12 जुलाई को चीफ जस्टिस को लिखी चिट्ठी पर सुनवाई की थी। इस दौरान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिए कि पीड़ित और उसके परिजन को सुरक्षा मुहैया कराई जाए। इसके अलावा अंतरिम राहत के तौर पर 25 लाख मुआवजा भी दिया जाए। कोर्ट ने दुष्कर्म पीड़िता से जुड़े सभी मामले दिल्ली ट्रांसफर करने के आदेश भी दिए थे। इसके अलावा सीबीआई को निर्देश दिया था कि सड़क हादसे की जांच 7 दिन के भीतर और बाकी मामलों की सुनवाई 45 दिन के भीतर पूरी की जाए।

2017 में दुष्कर्म हुआ था
लड़की से 2017 में सामूहिक दुष्कर्म हुआ था। आरोप है कि विधायक सेंगर और अन्य ने नौकरी दिलाने के बहाने लड़की से दुष्कर्म किया। पीड़िता उस वक्त नाबालिग थी। बाद में पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में मौत हो गई। आरोप है कि उसके पिता से विधायक ने ही मारपीट की थी। पिता की मौत के बाद पीड़िता ने लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह की कोशिश की थी। इसके बाद एसआईटी को जांच सौंपी गई थी। अभी जांच सीबीआई के पास है। बुधवार को भाजपा ने विधायक सेंगर को पार्टी से निष्कासित कर दिया। सेंगर अभी सीतापुर की जेल में है।

दुष्कर्म मामले में अब तक 5 एफआईआर
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म मामले की जानकारी ली। सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि दुष्कर्म से जुड़े मामले में 4 एफआईआर हुई थीं। ये आरोपियों और पीड़ित पक्ष ने एकदूसरे के खिलाफ दर्ज कराई हैं। पांचवीं एफआईआर रायबरेली में हुए कार एक्सीडेंट से जुड़ी है। पांच में से तीन मामलों में चार्जशीट दायर हो चुकी है।