रियाद. सऊदी अरब में महिलाएं अब बिना पुरुष अभिभावकों की मंजूरी के विदेश यात्रा पर जा सकेंगी। सऊदी सरकार ने गुरुवार को आदेश जारी करते हुए पहली बार महिलाओं को यह छूट दी। इससे पहले पारंपरिक गार्डियनशिप सिस्टम के तहत महिलाओं को कानूनी रूप से स्थाई तौर पर अवयस्क माना जाता था। इसके चलते परिवार के पुरुष (पिता, पति या अन्य रिश्तेदार) अभिभावकों को महिलाओं पर मनमाने तरीके से अधिकार जमाने का हक मिल जाता था।

बिना पुरुष अभिभावक की इजाजत के शादी भी कर सकेंगी
सरकारी अखबार ओकाज ने शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से बताया कि नए कानून के तहत अब 21 साल के ऊपर की महिलाएं खुद पासपोर्ट ले सकती हैं, शादी कर सकती हैं और बिना अभिभावक की इजाजत के देश भी छोड़ सकती हैं।

वॉशिंगटन में अरब गल्फ स्टेट्स इंस्टीट्यूट की क्रिस्टिन दीवान के मुताबिक, इस फैसले से महिलाओं को ज्यादा स्वायत्ता मिलेगी। अगर यह नियम पूरी तरह से लागू होता है तो महिलाओं को उनके जीवन का नियंत्रण देने का सऊदी शासन का यह बड़ा फैसला होगा।

सऊदी काे इस फैसले मानवाधिकार संगठनों ने खुशी जताई है। कार्यकर्ताओं की सालों की मेहनत के बाद सऊदी शासन ने अब महिलाओं को लेकर नियमों में ढील देना शुरू किया है। महिला अधिकारों के लिए लंबी लड़ाई लड़ने वाले लूजेन अल-हथलूल ने इसी हफ्ते सऊदी अरब में जेल में अपना 30वां जन्मदिन मनाया था। अपने हक के लिए आवाज उठाने वाली कई महिला कार्यकर्ताएं अब भी सऊदी में सजा काट रही हैं।

पिछले साल महिलाओं को मिली ड्राइविंग की छूट
सऊदी अरब क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के सत्ता में आने के बाद से यहां महिलाओं को कई हक मिले हैं। दो साल पहले महिलाओं को फुटबॉल स्टेडियम में बैठकर मैच देखने की इजाजत मिली थी। वहीं महिलाओं को ड्रा‌इविंग की छूट भी पिछले साल जून में दी गई थी। 2020 तक 30 लाख महिलाओं को ड्राइविंग लाइसेंस दिए जाने का लक्ष्य है।

विजन 2030 का असर
सऊदी अरब की गिनती दुनिया के सबसे कट्टरपंथी देश के तौर पर होती है, जहां महिलाओं के लिए पाबंदियां बहुत ज्यादा और सख्त हैं। हालांकि, देश विजन 2030 के तहत तेल के निर्यात से होने वाले राजस्व पर निर्भरता कम करना चाहता है। प्रिंस सलमान इसके लिए देश में कई बदलाव कर रहे हैं। महिलाओं पर लगी पाबंदियों और नियम-कायदों को ढील देने के साथ सऊदी के लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने जैसे फैसले लिए गए हैं।