नई दिल्ली. हाल ही में यह खबर आई थी कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अगले साल से देश का पहला आर्मी स्कूल शुरू करने जा रहा है। यह स्कूल उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के शिकारपुर में बनाया जाएगा। इसका नाम पूर्व सरसंघचालक राजेंद्र सिंह उर्फ रज्‍जू भैया के नाम पर रखा जाएगा। रज्जू भैया का जन्म बुलंदशहर जिले के ही बनैल गांव में 1922 में हुआ था। इस स्कूल को आरएसएस की शिक्षा शाखा विद्या भारती चलाएगी। हालांकि, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सरकार्यवाह मनमोहन वैद्य ने भास्कर ऐप से बातचीत में कहा कि यह स्कूल पूरी तरह से आरएसएस का नहीं होगा और न ही अपनी तरह का यह देश का पहला स्कूल होगा। इससे पहले भी स्वयंसेवकों ने आर्मी स्कूल खोले हैं। मनमोहन वैद्य और विद्या भारती के केंद्रीय संगठन सचिव जेएम काशीपति से बातचीत के अंश-

आरएसएस को आर्मी स्कूल खोलने की जरूरत क्यों पड़ी?

मनमोहन वैद्य : पहले तो स्पष्ट कर दूं कि आरएसएस का काम शाखा लगाना है, स्कूल चलाना नहीं है। दूसरी बात यह कि मीडिया में जो खबरें आ रही हैं कि ऐसा पहला आर्मी स्कूल खोला जा रहा है, यह सही नहीं है। इससे पहले भी स्वयंसेवकों ने आर्मी स्कूल खोले हैं। हां, यह उत्तर प्रदेश का पहला आर्मी स्कूल जरूर हो सकता है। रही बात आर्मी स्कूल खोलने की जरूरत की तो यदि देश की सेवा के लिए बच्चों को तैयार किया जाए ताे इसमें गलत क्या है? आज जरूरत है कि बच्चों को सेना में जाने के लिए शिक्षित किया जाए। उन्हें तैयार किया जाए ताकि आगे चलकर वे देश सेवा कर सकें।

यह स्कूल कौन चलाएगा?

मनमोहन वैद्य : नियमों के अनुसार लोकल बॉडी बनाई जाती है और वो ही स्कूल का संचालन करती है। ये जरूर है कि हमारे स्वयंसेवक स्कूल चलाते हैं। देश में और भी आर्मी स्कूल हैं, जिसे हमारे स्वयंसेवक चला रहे हैं, लेकिन आरएसएस का काम स्कूल चलाना नहीं है।

यहां पर बाकी आर्मी स्कूलों जैसी ही शिक्षा दी जाएगी या कुछ अलग सिलेबस होगा?

जेएम काशीपति : उत्तर प्रदेश में खुल रहे आर्मी स्कूल को भी लोकल बॉडी बनाकर ही चलाया जाएगा। विद्या भारती इसकी पेरेंटल बॉडी है। इस स्कूल में नियमानुसार सिलेबस रहेगा। सीबीएसई का सिलेबस पढ़ाया जाएगा। हां, ये जरूर है कि यहां पर भी सरस्वती शिशु मंदिर की तरह सरस्वती वंदना, एकात्मता स्रोत, भोजन मंत्र, शांति पाठ सहित कुछ प्रार्थनाएं होंगी।

रिटायर्ड सैन्य कर्मी देंगे सेवाएं

शिकारपुर में संघ से जुड़े आर्मी स्कूल में 2020-21 से पढ़ाई शुरू हो जाएगी। इसमें छात्रों को सैनिक ट्रेनिंग देने की विशेष व्यवस्था होगी। इसके लिए सेना से रिटायर्ड सैन्यकर्मी सेवाएं देंगे। स्कूल में छात्रावास की भी सुविधा रहेगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहले बैच में कक्षा छठी के लिए 160 छात्रों का दाखिला किया जाएगा। शहीदों के बच्चों को ‘आरक्षण योजना’ के तहत 56 सीटें मिलेंगी। पूर्व सैन्यकर्मी और किसान राजपाल सिंह ने इस स्कूल के निर्माण के लिए जमीन दान की थी। इसका क्षेत्रफल 20,000 स्‍क्‍वेयर मीटर है। निर्माण कार्य पिछले साल 24 अगस्त से शुरू हो गया था। यह भूमि राजपाल सिंह जनकल्‍याण सेवा समिति ट्रस्‍ट की संपत्ति है।

नासिक में भी खुला था मिलिट्री स्कूल

1937 में नासिक में ‘ भोंसला मिलिट्री स्‍कूल’ की स्थापना हुई थी। इसकी शुरुआत बीएस मुंजे ने की थी। मुंजे आरएसएस के संस्‍थापक केशव बलराम हेडगेवार के गुरु थे। इस स्‍कूल का संचालन सेंट्रल हिंदू मिलिट्री एजुकेशन सोसायटी की ओर से किया जाता है। इसकी एक ब्रांच नागपुर में भी है।