धर्म डेस्क. देव गुरु बृहस्पति 11 अगस्त से मार्गी होंगे। धार्मिक कार्य, बौद्धिक क्षमता, पद-प्रतिष्ठा, मान-सम्मान के कारक माने जाने वाले गुरु के मार्गी होने का प्रभाव जनमानस और प्रकृति पर भी नजर आएगा। गुरु को सौम्य माना गया है तथा जहां इनकी दृष्टि होती है वहां पाप ग्रहों की क्षमता कम हो जाती है। परिस्थितियां अनुकूल हो जाती है। इसलिए उनकी दृष्टि को अमरत्व माना गया है।

> 11 अगस्त को श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी पर रविवार को गुरु वृश्चिक राशि में मार्गी होंगे। गुरु धनु राशि में 29 मार्च को आए थे। 10 अप्रैल को वक्री अवस्था में थे। वक्री होने के कारण 30 अप्रैल को वृश्चिक राशि में वापसी कर गए थे। अब 11 अगस्त को फिर से मार्गी हो जाएंगे। गुरु वृश्चिक राशि में ही मार्गी होंगे। ज्योतिषविद् अर्चना सरमंडल के अनुसार कोई भी ग्रह वक्री होता है तो पीछे की तरफ चलते हुए व मार्गी होता है तो आगे की तरफ चलते हुए प्रतीत होता है। गुरु के मार्गी होने का असर राशियों पर नजर आएगा।

> ज्योतिषविद् पं. अमर डिब्बावाला के अनुसार पांच महीने के वक्रत्वकाल के बाद सुबह 7.42 पर मार्गी होंगे। इनका मार्गी संचरण धनु राशि में प्रवेश के समय तक रहेगा। गुरु की दृष्टि के संबंध में ज्योतिषशास्त्र में प्रहर सिद्धांत है, किंतु परिशोधित दृष्टियों में गुरु अपने स्थान से पांच, सात व नौ की दृष्टि से देखते हैं। यानी इनकी पांचवी, सातवीं (पूर्व), नवीं दृष्टि उत्तरोत्तर लाभ देने वाली मानी गई है। वर्तमान में गुरु वृश्चिक राशि में गोचरस्थ है। यह अभी वक्री है। इनका खगोलीय अनुक्रम अलग प्रकार का है। गोचर गणना में 20 अंश 26 कला, 42 पिकला का मान है। सामान्यत: 19 अंश से ऊपर गुरु की स्थिति श्रेष्ठ मानी जाती है। इस दृष्टि से वृश्चिक में गुरु का वक्रत्वकाल है। यह 11 अगस्त तक रहेगा। इसके बाद गुरु वृश्चिक में ही मार्गी होकर मार्गी दृष्टि से ग्रहों को देखने का सकारात्मक प्रभाव दिखाएंगे।

5वीं, 7वीं, 9वीं दृष्टि का राशियों पर असर
गुरु का पांचवी दृष्टि से मीन राशि जो स्वयं की है, को देखना तथा सातवीं दृष्टि से वृषभ राशि को एवं नवीं दृष्टि से कर्क राशि स्थित सूर्य, बुध, शुक्र तीन ग्रहों को देखना शुभकारी रहेगा। रविवार के दिन मूल नक्षत्र व धनु राशि की साक्षी में गुरु का मार्गी होना प्राकृतिक दृष्टिकोण से अच्छा है। संयोग से इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेगा। ऐसे योगों में शुभ ग्रह का मार्गी होना कई प्रकार से सकारात्मक परिणाम देगा। गुरु के मार्गी होते ही व्यापार-व्यवसाय में तेजी आने की संभावना है। सोना-चांदी बाजार पर भी अच्छा असर होने की उम्मीद है।

वृषभ को लाभ के योग, कर्क को परिश्रम से सफलता
मेष- तनाव किंतु सफलता, नया काम शुरू होगा।
वृषभ – लाभ मिलने के योग, मित्रों का सहयोग।
मिथुन – दुश्मनों से सावधान, गुरु का पूजन करें।
कर्क – परिश्रम के बाद सफलता, सामाजिक कद बढ़ेगा।
सिंह – नौकरी प्राप्त करने के योग, गति बढ़ाएं।
कन्या – आकस्मिक धन लाभ, परिस्थिति से समझौता।
तुला – पराक्रम से सफलता, संपत्ति में वृद्धि के योग।
वृश्चिक – अवसाद से मुक्ति, परिवार में अच्छे संबंध रहेंगे।
धनु – वाहन भूमि खरीदने के योग हैं, परिवर्तन का योग।
मकर – परिश्रम से रुकी हुई संपत्ति प्राप्त होगी।
कुंभ – धन प्राप्ति के अवसर आएंगे, नया काम शुरू करें।
मीन – विद्यार्थियों का भाग्योदय, मान-सम्मान में वृद्धि।