नई दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को राज्यसभा में अनुच्छेद 370 हटाने का संकल्प पेश किया। इस पर पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा कि आज भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला दिन है। 1947 में दो राष्ट्र सिद्धांत को खारिज करने और भारत के साथ मिलने के जम्मू-कश्मीर नेतृत्व के फैसले को पीछे छोड़ दिया गया है। भारत सरकार की धारा 370 को रद्द करने का निर्णय गैरकानूनी, एकतरफा और असंवैधानिक है। ये भारत को जम्मू-कश्मीर में एक निरंकुश शक्ति बना देगा।

महबूबा ने ट्वीट किया कि उपमहाद्वीप के लिए इसके भयावह परिणाम होंगे। भारत सरकार के इरादे स्पष्ट हैं। वे यहां के लोगों को भयभीत कर जम्मू-कश्मीर का इलाका चाहते हैं। भारत कश्मीर पर अपने वादे निभाने में नाकाम रहा।

भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट किया कि अनुच्छेद 370 को हटाने के लिए संविधान संशोधन की जरूरत नहीं होगी। अमित शाह ने ससंद को यह सूचित कर दिया है कि राष्ट्रपति ने पहले ही इसकी मंजूरी दे दी है। अनुच्छेद 370 की आज मौत हो गई।

कश्मीर समस्या का समाधान शुरू- अनुपम

जम्मू-कश्मीर के मौजूदा हालात पर दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर ने कहा कि कश्मीर समस्या का समाधान शुरू हो चुका है। वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि सरकार मकसद हासिल करने क लिए मूल्यों को कुचलना चाहती है। रविवार आधी रात से जम्मू-कश्मीर में तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को नजरबंद कर दिया गया है। घाटी में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।

खेर एक कश्मीरी पंडित हैं। कई मौकों पर वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार का समर्थन करते देखे गए हैं। उनकी पत्नी किरण खेर भाजपा सांसद हैं। खेर कह चुके हैं कि अनुच्छेद 370 हटाकर ही घाटी में सभी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।

वहीं, पूर्व गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को नजरबंद किए जाने पर चिंता जताई है। उन्होंने सोमवार को ट्वीट किया, ‘‘जम्मू-कश्मीर के नेताओं को नजरबंद किया जाना इस बात का संकेत है कि सरकार अपने उद्देश्य को हासिल करने के लिए सभी लोकतांत्रिक सिद्धांतों और मूल्यों को कुचल देगी। मैं उन्हें नजरबंद किए जाने की आलोचना करता हूं।’’