नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट में विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में बुधवार को दूसरे दिन सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने निर्मोही अखाड़ा से रामजन्मभूमि पर अपना अधिकार साबित करने के लिए दस्तावेज मांगे। इस पर अखाड़ा ने कहा कि 1982 में वहां डकैती हुई, जिसमें सारे दस्तावेज गायब हो गए।

मध्यस्थता पैनल द्वारा मामले का समाधान नहीं निकलने के बाद कोर्ट मंगलवार से सुनवाई कर रहा है। नियमित सुनवाई तब तक चलेगी, जब तक कोई नतीजा नहीं निकल जाता। सुनवाई के दूसरे दिन निर्मोही अखाड़ा की ओर से वरिष्ठ वकील सुशील जैन ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच के समक्ष अपना पक्ष रखा।

निर्मोही अखाड़ा ने मंगलवार को मांग की थी कि विवादित 2.77 एकड़ की भूमि पर उनका नियंत्रण और प्रबंधन हो। उन्होंने कहा कि पूरे विवादित 2.77 एकड़ भूमि पर 1934 से ही मुसलमानों को प्रवेश करने पर मनाही है।

मार्च में बनाया था मध्यस्थता पैनल

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 8 मार्च को इस मामले को बातचीत से सुलझाने के लिए मध्यस्थता पैनल बनाया था। इसमें पूर्व जस्टिस एफएम कलीफुल्ला, आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर, सीनियर वकील श्रीराम पंचू शामिल थे। हालांकि, पैनल मामले को सुलझाने के लिए किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका। मध्यस्थता पैनल द्वारा समाधान नहीं निकलने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 6 अगस्त से मामले की नियमित सुनवाई होगी।

हाईकोर्ट ने विवादित जमीन को 3 हिस्सों में बांटने के लिए कहा था
2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 14 याचिकाएं दाखिल की गई थीं। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अयोध्या का 2.77 एकड़ का क्षेत्र तीन हिस्सों में समान बांट दिया जाए। पहला-सुन्नी वक्फ बोर्ड, दूसरा- निर्मोही अखाड़ा और तीसरा- रामलला विराजमान।