वॉशिंगटन. अनुच्छेद 370 हटाने के भारत सरकार के फैसले को एक तरह से समर्थन दिया है। अमेरिका ने पाक को फिर चेतावनी दी है कि वह अपनी जमीन पर पल रहे आतंकियों और आतंकी गुटों के खिलाफ कार्रवाई करे और नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर घुसपैठियों की मदद करना छोड़े। अमेरिका पहले भी कई बार यह बात कह चुका है। अमेरिकी हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी और सीनेट फॉरेन रिलेशन कमेटी ने बुधवार को एक संयुक्त बयान में यह बात कही।

बयान में भारत को भी नसीहत दी गई- लोकतंत्र में पारदर्शिता और राजनीतिक सहभागिता सबसे अहम है। उम्मीद है कि भारत सरकार जम्मू-कश्मीर में इन बातों का ध्यान रखेगी। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। लिहाजा उसकी यह जिम्मेदारी हो जाती है कि सभी नागरिकों को अहमियत मिले और उनके अधिकारों की रक्षा हो मसलन उन्हें सभा और सूचनाओं को साझा करने का हक मिले और सुरक्षा का अधिकार हो।

इमरान ने ब्रिटिश पीएम और सऊदी क्राउन प्रिंस से बात की
वहीं, अनुच्छेद 370 हटाने के भारत सरकार के फैसले से पाकिस्तान में घबराहट है। इसके चलते पाक प्रधानमंत्री इमरान खान ने बुधवार को अपने ब्रिटिश समकक्ष बोरिस जॉनसन और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान से बात की। दोनों नेताओं से चर्चा का मुख्य मुद्दा अनुच्छेद 370 का खात्मा और जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किया जाना था।

भारत के ऐतिहासिक कदम के बाद इमरान दुनियाभर के नेताओं से संपर्क बनाए हुए हैं। सोमवार को उन्होंने मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मुहम्मद और तुर्की के राष्ट्रपति रीसेप तायिप एर्दोआन से बात की थी। पाक के एक अफसर के मुताबिक, विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी भी जल्द ही कश्मीर के हालात और भारत के साथ संबंधों पर चर्चा करने चीन जाने वाले हैं। पाक ने यह फैसला किया है कि वह दुनिया को बताएगा कि कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले के क्या दुष्प्रभाव होंगे। वह इस मामले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भी उठाने की तैयारी कर रहा है।

3 दिन पहले खत्म किया गया अनुच्छेद 370
5 अगस्त को मोदी सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाते हुए जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा खत्म कर दिया था। अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश होंगे। जम्मू-कश्मीर में 20 जिले और विधानसभा होगी। लद्दाख में 2 जिले होंगे।