साइंस डेस्क. स्कॉटलैंड के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी कृत्रिम जीभ बनाई है, जिसका इस्तेमाल अल्कोहल में मिलावट का पता लगाने में किया जाएगा। यह इंसान की जीभ की तरह काम करती है इसमें भी कई टेस्ट बड्स हैं जो अलग-अलग तरह के स्वाद को पहचानने में समर्थ हैं। इसे ग्लासगो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने तैयार किया है। शोधकर्ताओं का दावा है कि ब्लैक कॉफी में क्या है ,यह इंसानी जीभ नहीं बता सकती, लेकिन कृत्रिम जीभ इसकी भी जानकारी देने में सक्षम है।

असली-नकली व्हिस्की में फर्क बताती है
शोधकर्ताओं के मुताबिक, इसे कृत्रिम जीभ इसलिए कहा गया है कि क्योंकि यह पूरी तरह से मनुष्य की जीभ की तरह है, लेकिन इसे प्रयोगशाला में तैयार किया गया है। यह स्वाद के बारे में ज्यादा और सटीक जानकारी देती है। यह नकली और असली व्हिस्की में अंतर बताने में समर्थ है। रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार, कृत्रिम जीभ की शुरुआत एक जांच करने वाली डिवाइस के तौर पर की गई थी और प्रयोग स्कॉच व्हिस्की पर हुआ था।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, जब कृत्रिम जीभ पर प्रकाश डाला जाता है तो इसमें लगी नैनोस्केल मेटल इसे अवशोषित करती हैं और अलग-अलग तरह की व्हिस्की के बारे में 99% तक सटीक जानकारी देती हैं। यह 12, 15 और 18 साल पुरानी व्हिस्की के बीच अंतर बताने में भी समर्थ हैं।

शोधकर्ता एल्सडेयर क्लार्क का कहना है- इस जीभ में दो तरह नैनोस्केल मेटल लगाए गए हैं जो टेस्टबड्स की तरह काम करते हैं। ये सोने और एल्युमिनियम से तैयार किए गए हैं। नैनोस्केल मेटल इंसान की टेस्टबड्स से 500 गुना ज्यादा छोटे हैं, जो स्वाद की तेज और सटीक जानकारी देते हैं।

क्लार्क के मुताबिक- हमने इसकी जांच के लिए व्हिस्की का इस्तेमाल किया ताकि भविष्य में इसका इस्तेमाल खाने-पीने की चीजों की जांच करने और क्वालिटी कंट्रोल में किया जा सकेगा। इसके साथ खाने को दाेबारा इस्तेमाल करने पर भी इसकी जांच कृत्रिम जीभ से की जा सकेगी।