धर्म डेस्क. महाभारत के महत्वपूर्ण पात्रों में से एक कर्ण भी था। कर्ण को दानवीर माना जाता है। महाभारत में कर्ण बड़ा कोई और दानी नहीं था। भगवान श्रीकृष्ण भी कर्ण को सबसे बड़ा दानी मानते थे। जब युद्ध में अर्जुन के प्रहारों से कर्ण घायल हो गया, तब कर्ण की परीक्षा लेने के लिए श्रीकृष्ण उसके पास गए। जानिए महाभारत से जुड़ा चर्चित प्रसंग…
श्रीकृष्ण ने कहा कर्ण को दानवीरता के लिए याद किया जाएगा
> श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा कि कर्ण को उसकी वीरता और दानवीरता के लिए हमेशा याद किया जाएगा। ये बात सुनकर अर्जुन बोले कि वो सबसे बड़ा दानवीर कैसे हो सकता है?
> इस बात को साबित करने के लिए श्रीकृष्ण ब्राह्मण के वेष में कर्ण के पास पहुंचे। कर्ण को प्रणाम किया। कर्ण ने उनसे वहां आने का कारण पूछा तो ब्राह्मण ने कहा कि मैं आप से कुछ दान मांगने आया हूं। आप की हालत देखकर अब कुछ नहीं मांगना चाहता, क्योंकि आप इस हालत में क्या दे सकेंगे? आप अब मृत्यु के करीब पहुंच चुके हैं।
> यह सुनकर कर्ण ने अपने पास पड़े पत्थर से अपना सोने के दांत तोड़कर ब्राह्मण को अर्पण कर दिए। इस दानवीरता से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण अपने वास्तविक रूप में आ गए और कर्ण को वरदान मांगने को कहा। कर्ण ने श्रीकृष्ण से कहा कि आप ही मेरा अंतिम संस्कार करें और मेरे वर्ग के लोगों का कल्याण करें। कर्ण की मृत्यु होने के बाद श्रीकृष्ण ने उसका अंतिम संस्कार किया।