नई दिल्ली. देश के कई राज्यों में बाढ़-भूस्खलन और बारिश से जुड़े हादसों में पिछले 12 दिन में 200 लोगों की मौत हो चुकी है। केरल के 14 जिले भारी बाढ़ और भूस्खलन से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। यहां 8 से 12 अगस्त के बीच मरने वालों का आंकड़ा 88 तक पहुंच गया है, जबकि 53 लापता हैं। कर्नाटक में 42 और महाराष्ट्र में 43 लोगों ने जान गंवाई है।

केरल में भूस्खलन के कारण मलप्पुरम में सबसे ज्यादा 29, कोझिकोड में 17, वायनाड में 12, कन्नूर में 9, त्रिशूर और इडुक्की जिले में 5-5, तिरुवनंतपुरम, अलप्पुझा, कोट्टायम और कसारगोड जिलों में 2-2 लोगों की जान गई। इसके अलावा राज्य में 53 लोग लापता हैं। वहीं, 838 घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। 63,506 परिवारों के ढाई लाख से ज्यादा लोगों ने 1413 राहत शिविरों में शरण ली है।

महाराष्ट्र में 4 लाख 74 हजार लोग सुरक्षित निकाले गए

कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और गुजरात में भी बाढ़ से हालात गंभीर हैं। सभी बाढ़ग्रस्त राज्यों में सेना और एनडीआरएफ बचाव अभियान में जुटी है। महाराष्ट्र में पुणे डिविजन के 5 जिलों (सांगली, कोल्हापुर, सतारा, पुणे और सोलापुर) में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 43 हो गई है। यहां के 584 गांवों से अब तक 4,74, 226 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।

कर्नाटक में 42, गुजरात में 29 की मौत हुई

इस मानसून सीजन में कर्नाटक में बाढ़ और भारी बारिश से 42, गुजरात में 29, उत्तराखंड में 8 और हिमाचल प्रदेश में 2 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में बिजली गिरने से 8 लोगों की जान चली गई। कर्नाटक में 50 लोग लापता हैं।

दक्षिण भारत में भारी बारिश क्यों हो रही है?
पश्चिम प्रशांत महासागर क्षेत्र में उठे दो तूफानों लेकिमा और क्रोसा के कारण देश के दक्षिणी राज्यों में भारी बारिश हो रही है। मौसम वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है। उनका कहना है कि पहले पश्चिम प्रशांत महासागर का भारतीय क्षेत्रों पर प्रभाव सीमित था। अब यह हिंद महासागर को डंप यार्ड के तौर पर इस्तेमाल करने लगा है। इसी का असर केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में भारी बारिश के रूप में दिख रहा है।