आरिफ मोहम्मद खान के चयन में दूसरी बात यह भी है कि खान को बीजेपी में ही नहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का शीर्ष नेतृत्व भी काफी तवज्जो देता रहा है. पिछले कई सालों से खान विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन (वीआईएफ) से जुड़े हुए हैं. दिल्ली के चाणक्यपुरी इलाके में स्थित यह थिंक टैंक (विचार समूह) 2009 से ही सक्रिय है. इस संस्थान से जुड़े कई लोग आज मोदी सरकार में विभिन्न पदों पर अपनी भूमिका बखूबी अदा कर रहे हैं. खान अपने भाषणों और प्रगतिशील सोच के कारण आरएसएस की हमेशा से पहली पसंद रहे हैं. बीजेपी में भी कई बड़े नेता मानते हैं कि अपनी तमाम बंदिशों के बावजूद वह मजहबी कट्टरता पर अपने तर्कों से सामने वालों को चित कर देते हैं और यही स्टाइल मोदी और गृह मंत्री शाह को भा गई.

बीते कई सालों से आरिफ मोहम्मद खान गैरराजनीतिक मंच से समाज में फैली कुरीतियों के खिलाफ प्रमुख तौर पर आवाज उठाते आ रहे हैं. खान का प्रगतिशील मुस्लिम चेहरा होना और केरल में 26 प्रतिशत मुस्लिम आबादी ने उनके राज्यपाल बनने में अहम रोल अदा किया है. इसके साथ-साथ तीन तलाक पर खान के बयान ने बीजेपी के लिए हमेशा ढाल का काम किया. संसद से लेकर अदालत तक आरिफ मोहम्मद खान की ट्रिपल तलाक पर दी गई तर्कसंगत दलील ने मोदी सरकार को काफी फायदा पहुंचाया. खान ने कई मौकों पर यह जताने की कोशिश कि मोदी सरकार तीन तलाक कानून मुस्लिमों के खिलाफ नहीं बल्कि मुस्लिमों के हित में लाई है. बता दें कि आरिफ मोहम्मद खान ‘कुरान एंड कंटेम्परेरी चैलेंजेज’ नामक बेस्ट सेलर किताब भी लिख चुके हैं.।