अयोध्या में राम जन्म भूमि पर मालिकाना हक के मुकदमे में बुधवार को मुस्लिम पक्ष ने दलील पेश की और कहा कानूनी रूप से वहां हक मुस्लिम पक्ष का है हिंदू पक्ष को साबित करना होगा कि 22:00 23 दिसंबर 1949 के पहले उनका वहां क्या अधिकार था

मुस्लिम पक्ष की दलील निर्मोही अखाड़ा राम चबूतरे पर ही पूजा करता था

सिर्फ 22 23 दिसंबर की रात को रखी गई मूर्तियों के कारण अंतर दावा किया गया है

अयोध्या राम जन्म भूमि पर मालिकाना हक के मुकदमे में बुधवार को मुस्लिम पर्सनल दलील दी है कि जन्म स्थान पर मूर्ति रखकर दावा जरूर किया जा रहा है लेकिन कानूनी रूप से वह हक मुस्लिम पचका है मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि हिंदू पक्ष को साबित करना होगा कि 22 23 दिसंबर के पहले हिंदू पक्ष का क्या अधिकार था निर्मोही अखाड़ा बाहर राम चबूतरे पर पूजा किया करता था उसने कभी अंदर अधिकार का दावा नहीं किया था 22:00 23 दिसंबर की रात कोई गलती के कारण हुए अंदर अधिकार का दावा कर रहे हैं मुस्लिम पक्ष की बहस गुरुवार को भी जारी रहेगी राजीव धवन ने निर्मोही अखाड़े के मुकदमे की कानूनी कमजोरियों को उजागर करते हुए कोर्ट से कहा इसका मुकदमा शिकार करने लायक नहीं है पवन ने कानून की निगाह में एक बार कोई गलती के लगातार जारी रहने और उसमें अधिकार सुजीत होने की अवधारणा का विरोध करते हुए पूर्व के फैसलों का हवाला दिया

राजीव धवन ने कहा वास्तविक कब्जे और कानून कब्जे में बड़ा अंतर है कानून की निगाह में अगर कोई गलती होती है तो उससे जो हानि होती है उसका हर्जाना मिलता है मौजूदा मामला वास्तविक कब्जे का है दिसंबर 1949 की रात एक दुष्कृति हुई इसके बाद 5 जनवरी 1950 का मजिस्ट्रेट का आदेश है यथा स्थिति बनाए रखने का मजिस्ट्रेट के आदेश दुष्कृति कानून में हर्जाना मिलने का अधिकार खत्म हो गया

निर्मोही अखाड़ा का क्या अधिकार था साबित करें 1949 से पहले धवन ने कहा कि मौजूदा मामले में 22:00 23 दिसंबर 1949 को एक गलती हुई जो कि पांच जनवरी 1950 को मजिस्ट्रेट का आदेश होने के बाद लगातार चलती रहे इसके आधार पर अधिकार सृजीत होने लगे इसके आधार पर अधिकार का दावा नहीं किया जा सकता उसे आधार बनाकर मास्टर से यह नहीं कहा जा सकता कि उन्हें उस जगह का अधिकार दे दिया जाए ने पहले साबित करना होगा किन दलीलों पर जस्टिस अशोक भूषण ने कहा हिंदू शुरू से उस जगह के उपयोग पूजा का दावा करते रहे धवन ने कहा कि मजिस्ट्रेट को गलती जारी रखने के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता मजिस्ट्रेट से कानून के प्रति कर्तव्य निर्वहन करता है इसलिए उसे लगातार जारी रहने वाली गलती नहीं कहा जाएगा और इस आधार पर इसका मुकदमा समय बाधित नहीं माना जाएगा

ट्रस्टी और सेवादार में अंतर है धवन ने कहा कानून की निगाह में ट्रस्टी और सेवादार में अंतर है सेवादार मालिक नहीं होता निर्मोही अखाड़ा सिर्फ सेवादार है इसलिए उसकी अपील में अन्य चीजों पर बिताया गया वक्त सही नहीं है निर्मोही बाहर राम चबूतरे पर पूजा करते थे उन्होंने अंदर का भी हक नहीं जताया सिर्फ 23 दिसंबर की रात की घटना के बाद से वह अंदर दावा कर रहे हैं