हर मोर्चे पर मिल रही सफलता से निराश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और आत्म अवलोकन की मुद्रा में है उन्होंने अफगानिस्तान में सोवियत रूस के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका का साथ देने को पाकिस्तान की बड़ी गलती माना इमरान के अनुसार पाक को तटस्थ रवैया अपनाना चाहिए था

अफगानिस्तान में अमेरिका सेना दो दशक से तालिबान के खिलाफ लड़ाई जुड़े हुए हैं रसिया को दिए गए साक्षात्कार मैं इमरान ने कहा शिद्दत से महसूस करता हूं कि पाकिस्तान को इस लड़ाई से पहले अलग रहना चाहिए था क्योंकि इसमें शामिल होना उसके खिलाफ किया हमारे 70000 लोगों की जान गई और 100 अरब डालर की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो गई इसके बाद अमेरिका के अफगानिस्तान में ना जीतने का दोष हमें दिया जा रहा है उन्होंने कहा कि यह पाकिस्तान के साथ अच्छा नहीं हो रहा है इमरान का यह बातचीत अक्टूबर में होने वाली फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की बैठक में पूर्व दुनिया को दी जा रही सफाई माना जा रहा है आतंकी संगठनों को मिलने वाले धन पर रोक लगाने में विफल रहे पाक को ब्लैक लिस्ट में डाला जा सकता है FATF की कार्रवाई से पाक को अंतरराष्ट्रीय सहायता मिलनी मुश्किल हो जाएगी साक्षात्कार में पार्क प्रधानमंत्री इमरान ने माना कि पार्क में पैदा हुई आतंकी संगठनों ने अमेरिका से धन लेकर अफगानिस्तान में सोवियत रूस की सेना से लड़ाई लड़ी अब वही संगठन पार्क पर भी भारी पड़ रहे हैं अमेरिका की आतंकवाद विरोधी लड़ाई में शामिल होकर पाकिस्तान ने अपने लोगों को खोया और अर्थव्यवस्था बर्बाद कर ली नतीजा यह हुआ कि पाकिस्तान की नगद धनराशि के लिए मोहताज हो गया अब कई देशों से मुद्रा कोष से धन लेकर काम चल रहा है ऐसा ही बयान पाक गृह मंत्री एजाज अहमद शाह ने दिया था उन्होंने कहा था कि पाक में आतंकी संगठनों को पालने में और वह रुपए खर्च किए अब वही संगठन मुसीबत बन गई है इसी से चलते दुनिया का कोई भी देश पाक के साथ नहीं खड़ा है उन्होंने यह बात हाल में जम्मू कश्मीर मामले पर पाक के छेड़े अभियान को समर्थन ना मिलने पर कहीं उन्होंने इसके लिए इमरान समेत सभी पूर्व प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को जिम्मेदार ठहराया अब पाक या मान चुका है कि आतंकवाद को संरक्षण देकर उसने अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारी है