भारत के हाथों पराजय के बाद पाक अपमानजनक माना जाता है नियाजी कश्मीर को खुलेआम मुस्लिम भावनाओं के अपील पर आक्रमक तेवर दिखा रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को अपने देश में ही ‘गो नियाजी गो बैक’ नारे का सामना करना पड़ रहा है यहां तक कि संसद में भी उन्हें नाराज होना पड़ रहा है इमरान ने शुक्रवार को कश्मीर में समर्थन मैं मुजफ्फराबाद में बहुचर्चित जलसा आयोजित किया था उससे पहले की एक भीड़ ने उनके सरनेम की ओर इशारा करते हुए ‘गो नियाजी गो बैक’ के नारे लगाए नियाजी कंकर पाकिस्तान में 1971 में भारत के हाथों हुई अपनी शर्मनाक पराजय की ओर इशारा किया

उस समय पाकिस्तानी सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अमित अब्दुल खान नियाजी में उन्होंने भारतीय सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोरा को 16 दिसंबर 1971 को अपना प्यार सौंपा था तब से नियाजी वहां अपमानजनक माना जाता है नियाजी पश्तून होते हैं यह समुदाय अफगानिस्तान और पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में निवास करती है पाकिस्तान में बड़ी संख्या में एक समुदाय मियांवाली में बसा है मजेदार है कि पूर्व सेना प्रमुख अब्दुल खान नियाजी और इमरान खान नियाजी लाहौर में पैदा हुए हैं नवंबर 2014 में विपक्षी पार्टी पाकिस्तान तकरीर- ए-इंसाफ के नेता के रूप में इमरान ने 2013 में चुनाव में धांधली के विरोध में 14 दिसंबर को देशव्यापी बंद का आवाहन किया था जाहिर है कि यह उस दिन तो भूल गए थे बाद में उन्होंने विरोध प्रदर्शन की तारीख बदल दो रिपोर्टरों में बताया गया कि शुक्रवार के जलसे में भाग लेने वाले की संख्या कम ही रहे आम आदमी इससे दूर ही रहे और प्रशासन ने सरकारी कर्मचारियों को लाकर भीड़ दिखाने का प्रयास किया कुछ लोगों ने जलसा को फ्लॉप शो कहा

इन सब को लेकर इमरान खान पाकिस्तान प्रधानमंत्री को आम लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है