पीपल की छाल का चूर्ण रोग में अत्यंत लाभकारी होता है छाल की जलीय अस्तर कीटाणु एवं कृमि नाशक होता है वही पीपल के पत्तों से युक्त छोटी टहनियों का प्रयोग चर्म रोग में राहत पाने के लिए किया जाता है इसके चूर्ण को नारियल के तेल में मिलाकर लगाया जाता है या उबालकर इसके पानी में प्रभावित स्थान को धोना होता है
पीपल के पके हुए फल हृदय रोगों के लिए गुणकारी होते हैं यह शीतल का प्रेरक दोष दोष नाशक गुणों से भी भरपूर होते हैं
पीपल के कोमल पत्तों को गेहूं के गीले आटे में पीसकर इसका लेप चर्म सूजन फोड़े फुंसी पर लगाने से लाभ होता है
पीपल के पत्ते हुए फलों को सेवन करने से बच्चों के तोतले पन की समस्या में लाभ मिलता है
जलने से हुए फोटो में पीपल की छाल का चूर्ण घी में पकाकर प्रभावित जगह पर लगाने से आराम मिलता है
पीपल से स्रावित होने वाली लाख कड़वी स्निग्ध वाह चित्रकारी होती है इसके सेवन से कफ पित्त रक्त विकार चोर आदि का नाश हो जाता है
पीपल की ताजी टहनी से रोजाना दातुन करने से दांत मजबूत होते हैं और मसूड़ों की सूजन खत्म हो जाती हो मुंह में आने वाली दुकान भी खत्म होती है
स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए पीपल के 6 -7 ताजा पत्तो को 2 कप कच्चे दूध मैं उबालकर प्राप्त मात्रा में मिश्री मिलाकर सेवन करना चाहिए

भारत देश के सभी प्रांतों में पाए जाने वाले पीपल के वृक्ष से हमें अनेक तरह से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होते रहें एक समय बाद काफी विशाल हो जाते हैं पीपल के वृक्ष और तना बहुत मोटा होता है इसका फल गोल होता है पीपल सबसे ज्यादा ऑक्सीजन देने के कारण उपयोगी होते हैं इसकी छाल पत्र और फल को भी आयुर्वेद में कई तरह से इस्तेमाल किया जाता है इसीलिए पीपल को देव वृक्ष जीवन अमृत कहा गया है